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आदरणीय सभी सदस्य, सप्रेम ओम ! राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु 25.11.2010 को निम्न पत्र प्रधान न्यायधीश सर्वोच्च्य न्यायलय को मैने लिखा है। आप सभी से भी विनम्रता पूर्वक प्रार्थना है की इसी आशय का पत्र बनाकर रजिस्टरड डाक से सभी भेजे, यह अत्यन्त आवश्यक है।
सेवा मंे,
श्रीमान प्रधान न्यायाधीश महोदय
भारतीय सर्वोच्च्य न्यायलय (सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया)
भगवान दास रोड, नई दिल्ली-110001
विषयः- जनगणना 2011 एवं बांग्लादेशी घुसपैठ समस्या पर जनहित याचिका।
बांग्लादेश विश्व के उन सबसे बड़े देशों में है जो लगातार शरणार्थियों को पैदा कर रहे हैं। इसका खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है क्योंकि भारत में प्रतिदिन लगभग 6000 बांग्लादेशी घुसपैठ करतें, यह अवैध घुसपैठ प्रतिवर्ष लगभग 22 लाख होती है। ये कथन किसी राजनेता का नही अपितु असम के पूर्व राज्यपाल ले. जनरल अजय सिंह का कहना है। अगर समय रहते उपाय न किए गए तो भारत आबादी के बोझ के कारण एक गहरे संकट में फंस सकता हैं।
1. बांग्लादेश की ओर से जारी अनियंत्रित और अवैध घुसपैठ ने पिछले कुछ दशकों में भारत के खिलाफ जनसांख्यिकीय हमले का रूप धारण कर लिया है।
2. इनका उद्देश भारत की अर्थव्यवस्था एवं सुरक्षा को कमजोर करनें के लिए अपनें साथ जाली मुद्रा एवं खतरानक हथियार भी लातें है।
3. गुजरे एक दशक में पश्चिम बंगाल के कस्बों-देहातों में जनसंख्या विस्फोट हुआ है। मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण इन जिलों में रहने वाले मूल निवासियों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा है। पलायन कर चुके इन परिवारों के आंकड़े केंद्र और राज्य सरकार दोनों के पास हैं। किन्तु, इनको आज तक जारी नहीं किया गया।
4. पिछले पंद्रह वर्षों में भारत बांग्लादेश सीमा के दोनो और करीब 3000 से ज्यादा मस्जिदें और मदरसे उग आए हैं। यहां घुसपैठिओं के बीच कट्टरपंथी इस्लामिक एवं राष्ट्रविरोधी विचारधारों का खुलेआम प्रचार किया जाता है।
5. भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक समय आने पर पाकिस्तानी एजेंसियां इन कट्टरपंथियों का इस्तेमाल पूर्वोत्तर को काटने के लिए कर सकती हैं।
6. ये देश में कभी भी कही भी साम्प्रदायिकता हिंसा फैला सकतें है।
7. भारत सरकार के बोर्डर मैनेजमेण्ट टास्क फोर्स की वर्ष कि 2000 रिपोर्ट के अनुसार 1.5 करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठ कर चुके हैं और लगभग तीन लाख प्रतिवर्ष घुसपैठ कर रहे हैं। रिपोर्टे के अनुसार भारत में बांग्लादेशी घुसपैठीयों की संख्या इस प्रकार हैः पश्चिम बंगाल 54 लाख, असम 40 लाख,बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि में 5-5 लाख से ज्यादा दिल्ली में 3 लाख हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस के अनुसार, दिल्ली में 13 लाख बांग्लादेशी हैं।
मगर वर्तमान आकलनों के अनुसार भारत में करीब ५ से 7 करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं। इस घुसपैठ मे भारत के देशद्रोहियों का पूरा सहयोग एवं खुला समर्थन प्राप्त है।
8. इन घुसपैठयों को भारत में रहने का जरुरी इन्तजाम राजनैतिक संगठन करतें जिससें इनहें असनी से राशन कार्ड, वोटिग कार्ड भी बन जाता है। जिसके फलस्वरुप बांग्लादेशी घुसपैठीया इन्हें अपना वोट देकर चुनाव में इनके प्रत्यासी को जिताते भी हैं।
9. पश्चिम बंगालं 282 विधानसभा सीटों में 52 विधानसभा सीटों पर हार-जीत का फैसला पूरी तरह से बांग्लादेशी घुसपैठिए करते हैं। जबकि अन्य १०० सीटों पर हार-जीत मेंये महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।
10. बांग्लादेश से लाखों की संख्या में अवैध रूप से भारत में आएघुसपैठियों के कारण देश की आंतरिक अशांति उत्पन्न होने के साथ इनकी संख्या आज खतरनाक हद तक बढ़ती जा रही है, जो देश पर बाहरी हमले जैसी घटना है।
11.जहाँगीर खाँ के मुगलस्तान रिसर्च इन्स्टीट्यूट, बांग्लादेश ने एक नक्शा प्रकाशित किया है, जिसके अनुसार पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच भारत क्षेत्र में घुसपैठ आदि के द्वारा एवं मुस्लिम जनसंख्या बढाकर इसे एक नया इस्लामी राज्य बना देना है। इसमें पश्चिम बंगाल, असम, बिहार,उत्तर प्रदेश, कश्मीर, उत्तराखण्ड, दिल्ली, हरियाणा और मध्य प्रदेश के क्षेत्र को सम्मिलित करने कि योजना है। इसलिये इन उपर्युक्त क्षेत्रो में बांग्लादेशी मुसलमानों का घुसपैठ प्रमुखता से है।
12. बांग्लादेशी मुसलमान घुसपैठीया खुद को इस्लाम का सच्चा सिपाही कहतें हैं। ये भारत को मुस्लिम बहुल कर इसे इस्लामी राष्ट्र बनाना चाहते हैं,ताकि यहाँ के अन्य धर्मों को समाप्त किया जा सकेय क्योकि इस्लाम विश्व भर अन्य धर्म के समाप्त कर केवल इस्लाम को हि देखना चाहता है। भारत सरकार ने भी माना है कि भारत में बांग्लादेशी घुसपैठ के लिये धार्मिक और आर्थिक कारणों सहित अनेक कारण है।
13. दक्षिण दिनाजपुर के हिली गांव में भारत-बांग्लादेश सीमा पर कुछ दीवारें बनाई गई हैं, कोई नहीं जानता कि इन्हें किसने बनाया है, पर यह समझने में मुश्किल नहीं है कि यह तस्करों के गिरोह की करतूत है। वहां सुबह से शाम तक तस्करी और घुसपैठ का काम जारी रहती है। घुसपैठिए ज्यादा से ज्यादा गर्भवती महिलाओं को सीमा पार कराते हैं और उन्हें किसी भारतीय अस्पताल में प्रसव कराकर उसे जन्मजात भारतीय नागरिकता दिलवा हें हैं।
14. इसके बावजूद भारत (विशेषकर असम, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, उड़ीसा,प.बंगाल, उत्तर प्रदेश, और बिहार) की मतदाता सूची में लाखों की संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए शामिल हैं। लेकिन भारत सरकार जन प्रतिनिधित्व कानून 1950 की दफा 16(1) के अनुसार, अभी तक इनके मताधिकार को रद्द नहीं किया गया। इन घुसपैठियों को निकालना तो दूर की बात है, सरकार तो उनके संरक्षण का पूरा बंदोबस्त कर रही है।
15. 1971 के बाद से अब तक जिस तरह भारत में बांग्लादेशी घुसपैठ हुई है उससे अद्वितीय राष्ट्रीय पहचान पत्र को लेकर एक शंका उत्पन्न होती है। क्योंकि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर बनाते समय बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान को लेकर सरकार के पास न कोई स्पष्ट नीति है और ना ही राजनीतिक इच्छाशक्ति। ऐसे में वैसे बांग्लादेशी जो भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में भारत का नागरिक हो जाएगा। इन दिनों पूरे भारत में जनगणना का काम बड़ी तेजी से चल रहा है। 2011 की इस जनगणना के साथ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) भी तैयार किया जा रहा है। बताते चलें कि इस राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के आधार पर ही प्रत्येक व्यक्ति को एक अनूठी पहचान संख्या ‘यूआईडी’ जारी किया जाएगा। उसके बाद इसे राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के डाटाबेस में जोड़ा जाएगा। इसी के आधार पर राष्ट्रीय पहचान पत्र तैयार किया जाएगा। सूत्रों की मानें तो जनसंख्या रजिस्टर के आधार पर ही डीएनए डाटाबेस और नेशनल इंटेलीजेस ग्रीड भी तैयार किया जाएगा जिससे आतंकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। देश की सुरक्षा के नजरिए से उठाया गया यह कदम निश्चित ही सराहनीय है। यदि जनसंख्या रजिस्टर भरते समय बांग्लादेशी घुसपैठी प्रश्न 11 का उत्तार देते समय अपनी राष्ट्रीयता ‘भारतीय’ घोषित करता है तो उससे राष्ट्रीयता के बाबत र्कोई प्रश्न नहीं किया जाएगा और ना ही कोई सबूत मांगा जाएगा। रजिस्टर में वहीं लिखा जाएगा जो उत्तारदाता जनगणनाकर्मी को बताएगा। ऐसे में वे बांग्लादेशी जो भारत में अवैध रूप से रह रहा है,राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में भारत का नागरिक हो जाएगा।
हमें आशा है कि आप इस उक्त आवेदन पर लोकहित में उचित कार्यवाही करते हुए सम्बंधित विभागों को निर्देशित करेंगे
सधन्यवाद !
जय भारत वन्देमातरम!
प्रतिलिपियाँ:-
1. डा0 मनमोहन सिंह
प्रधानमंत्री भारत सरकार
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ)
नई दिल्ली-भारत
2. माननीय श्रीमती प्रतिभा पाटिल,
महामहिम राष्ट्रपति महोदया,
राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली 110004
(महोदया जी उचित कार्यवाही हेतु प्रार्थना)
प्रार्थी
k.k.sharma
president
shri gaur brahman mahasabha
bikaner
9785005949
In : jago hindu