अखिल भारतीय परशुराम दल गठित सवर्ण आरक्षण की मांग
मजबूती हेतु संगठन ने ये निर्णय लिया है कि वो देश के सभी राज्यों में अपनी रथ यात्राएं निकालेगा, जिसयात्रा का नाम होगा सद्भावना यात्रा । इस कार्य से अ.भ.प.द. को प्रत्येक प्रांतवासियों को अपनी बात पहुंचाने में आसानी होगी एवं ग्रामीण क्षेत्र के साथियों से भी अ.भ.प.द. का परिचय होगा ।
अ.भ.प.द. दल के सभी देशवासियों का अपना भाई मानता है चाहे वो किसी भी जाति वर्ग से हो किन्तु समाज में कुछ इसतरह की स्थिति उत्पन्न की गई है जिस कारण ब्राह्मïण को भी ब्राह्मïणवादी ठहराया गया है जैसे छूआछूत एवं भेदभाव को पूरे ब्राह्मïण समाज से जोड़ा गया है किन्तु समाज में उन तत्वों को उजागर नही ंकिया गया जिसमे ंब्राह्मïणों ने समाज को एक सूत्र में बांधने की प्रेरणा दी है । जिसके निम्रलिखित उदाहरण इस प्रकार है -
1. जिसमें सर्वप्रथम बंगाल के प. ईश्वरचंद विद्या सागर का नाम है जिन्होंने पुरे समाज के लिए कार्य किया ।
2. बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर को पढ़ाने वाले अध्यापक जिनका नाम अम्बेडकर था , वो जाति से ब्राह्मïण थे उनसे इतना प्रेम करते थे कि उन्होंने अपना नाम अम्बेडकर बाबा साहब भीम राव समा के लक्ष्यों और आदर्शों पर आधारित एकता हमारे समय की बहुत बड़ी मांग है । इसलिए सामाजिक परिस्थितियों के रूप को हमने जातिवाद जैसी निम्र धारणा को ना अपनाते हुए और ब्रह्मïण संगठन समाज की मूल आवश्यकताओं को एक सही जामा पहनाने का बीड़ा उठाया है जिसके लिए (अखभारतीय परशुराम दल) ने अपनी रूप रेखा तैयार की है जिस रूप रेखा से दल के प्रत्येक साथी को इस पत्र के माध्यम से अवगत कराया जा रहा है ।
समाज में गरीबी के कारण आरक्षण नीति के हकदार जरूरतमंद (ब्राह्मïणों को आरक्षण दिया जाए एवं (स्वर्ण आरक्षण) की मागं को हम सर्वप्रथम भारत सरकार के समक्ष रखेंगे जो कि एक राष्टï्रीय आंदोलन का रूप होगा जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से (अ.भ.प.द.) के सभी साथी भाग लेंगे इस आंदोलन को राष्टï्रीय आंदोलन का रूप देने के लिए अ.भ.प.द. ने अपने संगठन को पूरे भारत में स्थापित किया है जिसमें लगभग देश के 25 हजार साथियों से अ.भ.प.द. का सम्पर्क हो चुका है और अ.भ.प.द. की सैन्ट्रल कमेटी के पास इन साथियों की सूची है ।
संगठन की मजबूती हेतु सभी साथियों को सूचित किया जाता है कि अ.भ.प.द. किसी राजनैतिक दल से संपर्क नहीं रखता और यदि कोई साथी किसी राजनैतिक से जुड़ा हो तो वह उसका निजी क्षेत्र है वो अपने राजनैतिक क्षेत्र को अ.भ.प.द. से ना जोड़े । जिसका मुख्य कारण यह है कि इससे हमारे (अ.भ.प.द.) दलको उर्जा अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरी शक्ति से नही ंकर सकेगी और कुछ ब्राह्मïण संगठन जो राज्य स्तर स्तर व जिला स्तर पर कार्य कर रहे हैं व (अ.भ.प.द.) से भी जुड़े है उन साथियों से निवेदन है कि वो इसी प्रकार अपने कार्या को करते रहें, उनक ेकार्यों से अ.भ.प.द. कोई खेद नही ंहै परन्तु उन सभी संगठनों व साथियों से निवेदन है कि वो अपने कार्यों के साथ सात हमारे मूल लक्ष्य स्वर्ण आरक्षण कि मांग को ध्यान में रखे और अ.भ.प.द से जुड़े रहे जिसेस हमारे आंदोलन को गति मिले और आने वाली पीढिय़ों का भविष्य सुरक्षित रह सके ।