कश्मीर की मूल समस्या कारण मुस्लीम जनसंख्या वृद्धि के साइड इफेक्ट हैं

December 13, 2010
कश्मीर घाटी एक बार फिर सुलग रही है। उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुक्ती या अन्य सेकुलरों के अनुसार इसका कारण है सेना की ज्यादती। उनकी राय है कि सेना को यदि स्थायी रूप से हटा दें तो घाटी में स्थायी शांति हो जाएगी। मुख्यमंत्री तो बहुत समय से यह मांग कर रहे हैं क्या सेना हटा लेने से समस्या स्थायी हल हो जायेगा। उमर का राजनीतिक समाधान का राग वही है जो अलगाववादी और पाकिस्तान प्रेरित देशद्रोही नेता लम्बे समय से गाते आये हैं यानी जो लोग 1947 या उसके बाद कभी भी पाकिस्तान चले गये, उन्हें सम्मान सहित वापस लाएं, उन्हें नागरिकता देकर उनकी सम्पत्ति वापस करें, जो घुसपैठिये, आतंकवादी और पत्थरबाज जेल में हैं, उन पर दया की जाए, युवकों को सरकारी नौकरियां दी जाएं.. आदि। एक बात जो ये नेता नहीं बोलते पर इन सब मांगों में से स्वतः परिलक्षित होती है, वह यह कि बचे खुचे हिन्दुओं को भी घाटी से सदा के लिए निकाल दिया जाए। कश्मीर समस्या वस्तुतः नेहरू के पाप और अपराधों का स्मा़़रक है। दूसरे दृष्टिकोण से देखें तो यह मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि की समस्या है। इसे समझने के लिए डा. पीटर हैमंड द्वारा लिखित एक पुस्तक ‘स्लेवरी, टेररिज्म एंड इस्लाम, दि हिस्टोरिकल रूट्स एंड कन्टैम्पेरेरी थ्रैट’ का अध्ययन बहुत उपयोगी है। इसके बारे में अंग्रेजी साप्ता. उदय इंडिया (17.7.2010) ने बहुत रोचक विवरण प्रकाशित किया है। इसमें उन्होंने बताया है कि जनसंख्या वृद्धि से मुस्लिम मानसिकता कैसे बदलती है ? लेखक के अनुसार जिस देश में मुस्लिम जनसंख्या दो प्रतिशत से कम होती है, वहां वे शांतिप्रिय नागरिक बन कर रहते हैं। अमरीका (0.7 प्रति.), आस्टेªलिया (1.5 प्रति.), कनाडा (1.9 प्रति.), चीन (1.8 प्रति.), इटली (1.5 प्रति.), नार्वे (1.8 प्रति.) कुछ ऐसे ही देश हैं। चीन के जिन प्रान्तों में मुसलमान उपद्रव करते हैं, वहां उनकी संख्या इस प्रतिशत से बहुत अधिक होने से वहां उनकी मनोवृत्ति बदल जाती है। मुस्लिम जनसंख्या दो से पांच प्रतिशत के बीच होने पर स्वयं को अलग समूह मानते हुए वे अन्य अल्पसंख्यकों को धर्मान्तरित करने लगते हैं। इसके लिए वे जेल और सड़क के गुंडों को अपने दल में भर्ती करते हैं। निम्न देशों में यह काम जारी हैरू डेनमार्क (2 प्रति.), जर्मनी (3.7 प्रति.), ब्रिटेन (2.7 प्रति.), स्पेन (4 प्रति.) तथा थाइलैंड (4.6 प्रति.)। पांच प्रतिशत से अधिक होने पर वे विशेषाधिकार मांगते हैं जैसे हलाल मांस बनाने, उसे केवल मुसलमानों द्वारा ही पकाने और बेचने की अनुमति। वे अपनी सघन बस्तियों में शरीया नियमों के अनुसार स्वशासन की मांग भी करते हैं। निम्न देशों का परिदृश्य यही बताता है। फ्रांस (8 प्रति.), फिलीपीन्स (5 प्रति.), स्वीडन (5 प्रति.), स्विटजरलैंड (4.3 प्रति.), नीदरलैंड (5.5 प्रति.), ट्रिनीडाड एवं टबागो (5.8 प्रति.)। मुस्लिम जनसंख्या 10 प्रतिशत के निकट होने पर वे बार-बार अनुशासनहीनता, जरा सी बात पर दंगा तथा अन्य लोगों और शासन को धमकी देने लगते हैं। गुयाना (10 प्रति.), भारत (13.4 प्रति.), इसराइल (16 प्रति.), केन्या (10 प्रति.), रूस (15 प्रति.) आदि में उनके पैगम्बर की फिल्म, कार्टून आदि के नाम पर हुए उपद्रव यही बताते हैं। 20 प्रतिशत और उससे अधिक जनसंख्या होने पर प्रायः दंगों और छुटपुट हत्याओं का दौर चलने लगता है। जेहाद, आतंकवादी गिरोहों का गठन, अन्य धर्मस्थलों का विध्वंस जैसी गतिविधियां क्रमशः बढ़ने लगती हैं। इथोपिया (32.8 प्रति.) का उदाहरण ऐसा ही है। 40 प्रतिशत के बाद तो खुले हमले और नरसंहार प्रारम्भ हो जाता है। बोस्निया (40 प्रति.), चाड (53.1 प्रति.) तथा लेबनान (59.7 प्रति.) में यही हो रहा है। 60 प्रतिशत जनसंख्या होने पर इस्लामिक कानून शरीया को शस्त्रा बनाकर अन्य धर्मावलम्बियों की हत्या आम बात हो जाती है। उन पर जजिया जैसे कर थोप दिये जाते हैं। यहां अल्बानिया (70 प्रति.), मलयेशिया (60.4 प्रति.), कतर (77.5 प्रति.) तथा सूडान (70 प्रति.) का नाम उल्लेखनीय है। 80 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम जनसंख्या अन्य लोगों के लिए कहर बन जाती है। अब वे मुसलमानों की दया पर ही जीवित रह सकते हैं। शासन हाथ में होने से शासकीय शह पर जेहादी हमले हर दिन की बात हो जाती है। बांग्लादेश (83 प्रति.), इजिप्ट (90 प्रति.), गाजा (98.7 प्रति.), इंडोनेशिया (86.1 प्रति.), ईरान (98 प्रति.), इराक (97 प्रति.), जोर्डन (92 प्रति.), मोरक्को (98.7 प्रति.), पाकिस्तान (97 प्रति.), फिलीस्तीन (99 प्रति.), सीरिया (90 प्रति.), ताजिकिस्तान (90 प्रति.), तुर्की (99.8 प्रति.) तथा संयुक्त अरब अमीरात (96 प्रति.) इसके उदाहरण हैं। 100 प्रतिशत जनसंख्या का अर्थ है दारुल इस्लाम की स्थापना। अफगानिस्तान, सऊदी अरब, सोमालिया, यमन आदि में मुस्लिम शासन होने के कारण उनका कानून चलता है। मदरसों में कुरान की ही शिक्षा दी जाती है। अन्य लोग यदि नौकरी आदि किसी कारण से वहां रहते भी हैं तो उन्हें इस्लामी कानून ही मानना पड़ता है। इसके उल्लंघन पर उन्हें मृत्युदंड दिया जाता है। इस विश्लेषण के बाद डा. पीटर हैमंड कहते हैं कि शत-प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या होने के बाद भी वहां शांति नहीं होती क्योंकि अब वहां कट्टर और उदार मुसलमानों में खूनी संघर्ष छिड़ जाता है। भाई-भाई, पिता-पुत्रा आदि ही आपस में लड़ने लगते हैं। कुल मिलाकर मुस्लिम विश्व की यही व्यथा कथा है। अब इस कसौटी पर कश्मीर घाटी को रखकर देखें तो तुरन्त ध्यान में आ जाएगा कि वहां की मूल समस्या क्या है? पूरे भारत में मुस्लिम जनसंख्या भले ही 13.4 प्रतिशत हो पर घाटी में तो 90 प्रतिशत मुसलमान ही हैं। हिन्दू बहुल जम्मू की अपेक्षा मुस्लिम बहुल कश्मीर से अधिक विधायक चुने जाते हैं जो सब मुसलमान होते हैं। वहां मुख्यमंत्राी सदा मुसलमान ही होता है। शासन-प्रशासन भी लगभग उनके हाथ में होने से जम्मू और लद्दाख की सदा उपेक्षा ही होती है। 1947 से यही कहानी चल रही है। इस कहानी के मूल में नेहरू की मूर्खता, पाप और अपराध हैं। लेडी माउंटबेटन और शेख अब्दुल्ला से उनके संबंध अब सार्वजनिक हो चुके हैं। यदि कश्मीर का विलय भी नेहरू की बजाय सरदार पटेल के हाथ में होता तो हैदराबाद और जूनागढ़ की तरह यहां भी समस्या हल हो चुकी होती पर दुर्भाग्यवश इतिहास की घड़ी की सुइयों को लौटाया नहीं जा सकता। हां, उससे शिक्षा लेकर आगे का मार्ग प्रशस्त अवश्य किया जा सकता है। दुनियां के कई देशों में ऐसी समस्याओं ने समय-समय पर सिर उठाया है। चीन, जापान, रूस, बर्मा, बुलगारिया, कम्पूचिया, स्पेन आदि ने इसे जैसे हल किया, वैसे ही न केवल कश्मीर वरन पूरे देश की मुस्लिम समस्या 1947 में हल हो सकती थी। 1971 में बांग्लादेश विजय के बाद भी ऐसा माहौल बना था पर हमारे सेक्यूलर शासकों ने वे सुअवसर गंवा दिये। कुछ लोग इसके लिए अनुच्छेद 370 को बाधा बताते हैं पर यह ध्यान रहे कि दवा रोग मिटाने के लिए होती है। यदि उससे नया रोग पैदा होने लगे, तो उसे फेंकना ही उचित है। यदि अनुच्छेद 370 घाटी को देश से अलग करने में सहायक हो रहा है तो उसे वैध-अवैध किसी भी तरह समाप्त करना ही होगा। मुस्लिम वोटों के दलाल चाहे जो कहें पर यदि कश्मीर ही भारत में नहीं रहा तो इस आत्माहीन अनुच्छेद का क्या हम अचार डालेंगे ? अब वार्ता के नाटक का नहीं, निर्णायक कार्यवाही का समय है। इसमें जितना समय हमारे अदूरदर्शी राजनेता गंवा रहे हैं, कश्मीर उतना हाथ से निकल रहा है। कहते हैं कि जो इतिहास से शिक्षा नहीं लेते, उनके लिए इतिहास स्वयं को दोहराता है। सारा देश पूछ रहा है कि क्या एक बार फिर हम इसी नियति की ओर बढ़ रहे हैं ?
इस समस्या के निदान के दो पक्ष हैं। पहला तो अलगाववादियों का सख्ती से दमन। वह राजनेता हो या मजहबी नेता, वह युवा हो या वृद्ध, वह स्त्राी हो या पुरुषय वह मूर्ख हो या बुद्धिजीवीय वह मुसलमान हो या हिन्दू पर देश के विरोध में बोलने वाले को सदा के लिए जहन्नुम भेजने का साहस शासन को दिखाना होगा। ऐसे सौ-दो सौ लोगों को गोली मार कर उनकी लाश यदि चैराहे पर लटका दें तो आधी समस्या एक सप्ताह में हल हो जाएगी। हम अब्राहम लिंकन को याद करें जिन्होंने गृहयुद्ध स्वीकार किया पर विभाजन नहीं। इस गृहयुद्ध में लाखों लोग मारे गये पर देश बच गया। इसीलिए वे अमरीका में राष्ट्रपिता कहे जाते हैं। समाधान का दूसरा पहलू है कश्मीर घाटी के वर्तमान जनसंख्या चरित्रा को बदलकर उसे पूर्ववत हिन्दू बहुल बनाना। यह प्रयोग भी दुनियां में कई देशों ने किया है। तिब्बत पर स्थायी कब्जे के लिए चीन शासन ने लाखों चीनियों को वहां बसा कर मूल तिब्बती समुदाय को अल्पसंख्यक कर दिया है। हमें भी पूरे भारत से पूर्व सैनिक, जुझारू और शस्त्राप्रिय हिन्दुओं को, नाममात्रा के मूल्य पर खेतिहर जमीनें देकर घाटी में बसा देना चाहिए। ऐसे दस लाख परिवार यदि वहां पहुंच गये तो वे स्वयं ही 
अलगाववादियों से निबट लेंगे
 

आज राष्ट्रहित में 25/- रूपया खर्च करें

December 13, 2010

आदरणीय सभी सदस्य, सप्रेम ओम ! राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु 25.11.2010 को निम्न पत्र प्रधान न्यायधीश सर्वोच्च्य न्यायलय को मैने लिखा है। आप सभी से भी विनम्रता पूर्वक प्रार्थना है की इसी आशय का पत्र बनाकर ...


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परिचय एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी एक

December 13, 2010


सोनिया गांधी का वास्तविक नाम एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो है। एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो का जन्म 9 दिसम्बर 1946 को इटली के कौंटरा मैनी नामक स्थान पर हुआ। कौंटरा मैनी इटली के बैनीटो क्षेत्र के ...

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THE ESSCNCE OF HINDUISM OR HINDUISM SIMPLIFIED

December 13, 2010

THE ESSENCE OF HINDUISM   OR   HINDUISM SIMPLIFIED

 

Hinduism is the most democratic and all encompassing way of life.  English language does not have a word that describes the word DHARMA in its proper sense. The nearest word is duty or the sense of duty.  

It is described as the Sanatana Dharma or the ETERNAL DHARMA. The beginning was never said to have been propounded or revealed by any one person / individual. Its root lies in a keen observation of a repeating phenomenon observed by ...


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बीकानेर में मरणोपरान्त नेत्रदान किए

December 10, 2010
बीकानेर, 9 दिसम्बर। 35 वर्षीय पवनपुरी निवासी जितेन्द्र वासवानी के गत रात्रि निधन होने के बाद नेत्रदान किए गए हैं। उनके मरणोपरान्त नेत्रदान करवाने हेतू श्री गौड़ ब्राह्मण महासभा बीकानेर के अ...
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हल्दी से भी हो सकती है धनवर्षा......

December 4, 2010

हल्दी से भी हो सकती है धनवर्षा..

सामान्य रूप से हल्दी का रंग पीला होता है लेकिन क्या आपने कभी काली हल्दी के बारे में सुना है? नहीं सुना तो कोई बात नहीं हल्दी की एक प्रजाति काले रंग की भी होती है। ...


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छात्रावास में निर्धन, नेत्रहीन बच्चों को वस्त्र, गणवेश वितरित / श्री गौड़ ब्राह्मण महासभा का कार्यक्र

December 3, 2010
Shri Gaur Brahman Mahasabha Programme

Shri Gaur Brahman Mahasabha Programme


बीकानेर, 29 नवम्बर। श्री गौड़ ब्राह्मण महासभा के तत्वावधान में राजस्थान अंध विद्यालय, आई.टी.आई. के पास बीकानेर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें छात्रावास में रहने वाले ...

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BRAHMANS

December 3, 2010

The Brahmin castes may be broadly divided into two regional groups: 1.)Pancha-Gauda Brahmins and 2.) Pancha-Dravida Brahmins from South of Vindhya mountains as per the shloka, however this sloka is from Rajatarangini of Kalhana which is composed only in 11th CE.

Pancha Gauda Brahmins(Panch Gaur) : (1) Saraswat, (2) Kanyakubja, (3) Maithil Brahmins, (4) Gauda brahmins, and (5)Utkala Brahmins . In addition, for the purpose of giving an account of Northern Brahmins each of the provinces m...


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Famous Brahmin Personality

December 3, 2010

Adi Shankara was an Indian philosopher who consolidated the doctrine of Advaita Vedanta, a sub-school of Vedanta. His teachings are based on the unity of the soul and Brahman, in which Brahman is viewed as without attributes.

Anil Kumble is a former Indian cricketer. He is a right-arm leg spin bowler and a right-hand batsman. He is currently the leading wicket-taker for India in both Test and One Day International matches. At present he is the third highest wicket-taker in Test crick...


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Hitler was a Brahmin

December 3, 2010
RSS Chief, Guruji Golwalkarji, on the greatness of Hitler... " To keep up purity of the nation and its culture, Germany shocked the world by her purging the country of the Semitic races, the Jews. National pride at its highest has been manifested here. Germany has also shown how well-nigh impossible it is for races and cultures having differences going to the root, to be assimilated into a united whole, a good lesson for us in Hindustan to learn and profit by." 
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