विप्रों के नवोदय का शंखनाद, जुट गई 3 करोड़ की राशि / अगला विप्र महाकुंभ 25 से 27 दिसम्बर 2010 को गुवाहाटी में / प्रभा ओझा बोलीं, कुछ हासिल करने के लिए उत्तेजित हो जाएं
कोलकाता, 27 दिसम्बर। रविवार की सांय, कोलकाता का नजरुल मंच और विप्रों की एकता सहित अनेक मुद्दों पर आयोजित प्रथम महाकुंभ का समापन समारोह। दर्शक दीर्घा खचाखच। मंच से वक्ताओं का क्रमवार उद्बोधन भी चल रहा है। संचालन का जिम्मा संभाले मुख्य संयोजक गर्व से सीना फूलाए हुए सुशील ओझा भी बीच-बीच में हाथों में समाज के अग्रजों द्वारा समाज और युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए दिल खोलकर मिल रही सहायता राशि की ‘पर्चियां’ प्राप्त कर-कर के घोषणाएं कर रहे हैं, ‘दानवीरों’ को मंच पर बुलाकर अभिवादन भी करा रहे हैं।

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चैन्नई के संजय शर्मा द्वारा 1 करोड़ रुपए की राशि से शुरु हुआ क्रम राजस्थान के दाऊसर (रतनगढ़) के मूल निवासी एवं हाल में गुवाहाटी के निवासी 42 वर्षीय युवा, मेहनती और ईमानदार व्यक्तित्व पं. श्रीरतन शर्मा द्वारा प्रतिवर्ष 1 करोड़ रुपए सहयोगरुपी प्रदान करने की घोषणा के साथ अनवरत जैसे सुचारु हो गया। समापन समारोह से पूर्व लगभग 2 करोड़ 86 लाख की घोषणाएं ओझा कर चुके थे। अगले वर्ष इन्हीं तीन तिथियों 25, 26 और 27 दिसम्बर 2010 को गुवाहाटी में ऐसे महाकुंभ में पुन: एकत्रित होने की उद्धोषणा के साथ ओझा ने बताया कि राजस्थान ब्राह्मण संघ आज गौरवान्वित महसूस कर रहा है क्योंकि आज जिसकी कोख से ‘ऐसे बच्चे’ का जन्म हुआ है जो भारत को विश्व गुरु बनाने में सहायक सिध्द होगा। उन्होंने बताया कि 47 होटलों-धर्मशालाएं, 150 कार्यकर्ताओं की समर्पित टीम, 29 बसें, एयरपोर्ट-रेलवे स्टेशन पर समस्त व्यवस्थाएं कोलकाता में परशुराम जी के आशीर्वाद से विप्रों के एक नए युग की शुरुआत करेगा।
समापन समारोह में महाराष्ट्र महिला आर्थिक विकास महामण्डल की अध्यक्षा (स्टेट मंत्री) श्रीमती प्रभा ओझा ने एक मात्र महिला प्रतिनिधि के रुप में अपने वकतव्य में कहा कि मातृशक्ति, लक्ष्मी, देवी सहित आधी आबादी की उपमा दी जा रही है तो दर्जा भी बराबरी का कन्धे से कंधा मिलने जैसा मिलना चाहिए। अपनी ओर से मन और धन का पूर्ण सहयोग देने की बात के साथ ओझा ने अपने 18 मिनट के उद्बोधन में बताया कि वे जन्म से ब्राह्मणवादी हैं, महाराष्ट्र में ब्राह्मण होने की ठोकरें भी खाईं हैं। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण जहां कर्मकाण्डी होने के साथ अपने आप को भगवान का समझने लगा है यह सर्वथा गलत है। ओझा ने कहा कि उन्हें भाषण-तालियां मंजूर नहीं है ना ही चिकनीचुपड़ी बातें आती हैं अब कुछ हासिल करने के लिए बुरा (उत्तेजित होना) बनना पडेग़ा। राजनेताओं को बिगड़ैल और नामी चोर की संज्ञा देते हुए मंच से प्रभा ने जब कहा हमारे भविष्य का वक्त खतरनाक दिखाई दे रहा है ऐसे में प्रत्येक ब्राह्मण को अकाल मौत से बचने के लिए नित्य पिता के चरणों में तथा लक्ष्मी प्राप्ति के लिए मां के चरणों में शीश नवाकर अपना समर्पण देना होगा तो समूचा नजरुल मंच तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। गुर्जर गौड़ समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश जोशी (गोवा गुटखा), ने कहा कि महाकुंभ ने हजारों विप्रों की अनेक समस्याएं मिटाईं हैं उन्होंने समाज से आह्वान किया कि राजनेताओं की शक्ति को मजबूत करने हेतु पूरी शक्ति से हमें समर्थन देना होगा ताकि वे हमारा पक्ष राजनीतिक रुप से बुलंदी के साथ उठा सकें। उन्होंने गुर्जर गौड़ समाज की बैठक कर एक भव्य राशि संगठन को भेंट करने का शीघ्र आश्वासन दिया। दाधीच समाज के रामकुमार दाधीच ने संकल्प शक्ति के साथ आगे बढ़ने की बात कही वहीं पत्रकार गोपाल शर्मा ने महाकुंभ से संकल्प शक्ति लेकर लौटने का आह्वान कर जय परशुराम का ओजस्वी नारा लगवाया। सभी का आभार एवं संघ अध्यक्ष राजेन्द्र खण्डेलवाल ने जताते हुए कहा कि ब्राह्मण ना कभी झुका है ना झुकेगा। नवोदय-नव चेतना के शंखनाद में हर ब्राह्मण की सहयोगरुपी आहूति को जरुरी बताया। गायिका सीमा मिश्रा एवं टीम ने राजस्थानी गीत-संगीत नृत्य की रंगारंग प्रस्तुतियां देर रात तक दीं।

In : BRAHAMAN